Sunday, January 25, 2009

jai ho

जय हो। उन वीरो का जो जान के कुर्बानी देकर हमें आजाद भारत मैं साँस लेनेका मौका दिया। हम आजाद है यह अहसास ही हममे जोश भर देता है। कुर्बानी दाने वाले हेर जवान को सतसत नमन। आज हे हमने एक सर्वे रिपोर्ट देखि। इसमें बताया गया है की देश का यूथ हाल मPOST http://www.blogger.com/post-edit.do HTTP/1.0ैं हुई आतंकी घटना को लेकर डरा हुआ है और रीपुब्लिक डे परकिसी एक स्थान पर जुटने वाला नहीं है। वो किसी सेलेब्रेशन मैं सामिल भी नहीं होना चाहता। यह रिपोर्ट हमारे लिया एक चुनौती है। क्या वास्तव मैं हम ऐसा चाहते हैं। हम तो उस देश के हैं जहां अकले एक जवान ने दुस्मानिओं को पानी पिलाया है। फिर वो तेररोरिस्त हो या फिर कोई दुश्मन देश। हम देर गए इसका मतलब है हम हतियार दाल देने के मूड मैं हैं। ऐसा बुल्कुल नहीं है। हम लड़ना जानते है। भागना नहीं। दुनिया मैं ऐसा कोई एक्साम्प्ले भी नही है। हमने तो विपरीत स्थिथि मैं भी जीना सीखा है। मुग़ल काल की बंदिश और ईस्ट इंडिया कंपनी केराज को देखा है। भी स्तिथि मैं हम न झुके और न ही हार मानी। फिर ऐसा क्यों। जवाब भी हमंही देना है और अपने लिया रास्ता भी बनाना है। दुश्मोनको जवाब देना है। झुकना तो हमारी रागिओं मैं नही है। और देश पर कोई संकट आता है तो क्या हम बच पायंगे। बिल्कुल नही। इसलिय हम सड़क पर होंगे और एक साथ होंगे। मुकाबला करंगे। बतायंगे हम किसी से डरने वाले नही है। ख़ुद पर उतर आयन तो किसी क लिया चुनौती बन सकते है। हम होंगे न सड़क पर। फिर मिलेंगे। गणतंत दिवस के सुभकामना।




Wednesday, January 21, 2009

ओसामा और ओबामा मई फर्क क्या


ओसामा और ओबामा मई फर्क क्या। क्या सिर्फ़ ब और स का अन्तर है। ओबामा दुनिया के सबसे बड़े देश के प्रेजिडेंट के रूप मे सपथ ले चुके है। उनके सामने ग्लोबल क्रिसिस के साथ तेर्रोरिस्म बड़ी समस्या है। उन पर दुनिया की नेगाहीं हैं। ओबामा ने भरोषा जताया है आतंक से लड़ने का। पुरी दुनिया को भरोषा है की वो पटरी से उतर चुकी व्यस्था को फिर से ट्रैक पर लाने मैं सफल होंगे। जहाँ टेक ओसामा की बात है वो भी दुनिया के हित के बात करते हैं। फिर यह ब और स का अन्तेर ख़तम क्यों नहीं हो सकता।इस अन्तेर मे दुनिया की भलाई छिपी है। दोनों के एक होने पर साडी समस्या का समाधान अपने आप हो जायगा। अब तो दोनों को ब और स के अन्तेर को ख़तम करने की जगह दोनों को जोड़े कर बस क्यों नही देखते। या फिर सुब क्यों नही देखा जाता। थोड़ा प्रयास हमरी तेरफ से जरूरी है तो हमें भी सजग होना होगा। हम सभी तैयार है। अब तो एक हो जाओ भाई।















Thursday, January 15, 2009

एक वो राजू एक ये


एक वो राजू था, jentelman सा दिखने वाला। लोगों के खुशी मईअपनी खुसी तलासने वाला। सिम्पल सा दिखने वाला। बात कर रहा हूँ राजू बन गया जेंतेलमन की। कुह ऐसा हे अंदाज था सत्यम को लेकर आने वाले राजू के। अपने गोअंके लोगों के लिया क्या नही किया। देश मई भी पैठ बनाई। क्या फिल्मी राजू के तेरह सत्यम के राजू को भी पैसो से खलने का शगल था। असलियत सामने है। सुच जो भी हो पैर पूरी कहानी का ट्विस्ट तो जेंतेलमन राजू जैसा ही है। अपने ही लोगो के बीच बेगाना हो गया है। येही तो दौलत थी जोपैर पैसो के आंधी ने रेत जमा दी थे। क्यो नही समाज पाया राजू। या समाज कर भी भुला दिया। दोनों हे इस्तिथि ख़राब है। खतरनाक bhavisya का संकेत भी। समय आ गया है ख़ुद को टायर करने का। ख़ुद से सवाल करने का की पैसे के चक्कर मैं हम ख़ुद भी तो राजू नही बन बैठे थे और सुब कुह गवां बैठे।

Monday, January 12, 2009

bach jayaga सत्यम


सत्यम बच जायगा या गवर्नमेंट इसा बचा लेगी। यह बड़ा सवाल बन गया है। गवर्नमेंट के अब तक के प्रयास काफी है लेकिन विप्रो के साथ दो और कम्पनिओं को ब्लाक्लिस्तेद किया जाने के बाद शेयर इन्वेस्ट करने वालो का इस पैर भरोषा कर पाना मुस्किल है। क्यों आ गई है ऐसे हालत। क्या गवर्नमेंट मशीन का मोनिटरिंग सिस्टम फ़ैल हो चुका है जो सुब कुछ लूटने के बाद गवर्नमेंट को इसका पता चलता है। इन्वेस्टर्स का भरोषा अब भी गवर्नमेंट पैर है। इसी का रिजल्ट है की सत्यम मैं पैसा लगाने वाले कम नही हुआ हैं। इंडियन के इसी भरोशे पैर गवर्नमेंट को कम करना है और उसे बचाई रखना है। टाइम लगेगा लेकिन उम्मीद खोने से तो सुब कुह चला जायगा.

Tuesday, January 6, 2009

चाहता क्या hai pakistan


इंडिया का दिया गया सबूत khaarij कर आख़िर पाक चाहता क्या है। क्या woh war की taiyari कर चुका है। क्यों वो देश के लोगो के साथ खेल रहा है। आतंकवादी को सरन देने का उसका मकसद क्या है। क्यो woh दुनिया के सामने अपनी छवि ख़राब कर रहा है। इससे POST http://www.blogger.com/post-edit.do HTTP/1.0तो saaf हो जायगा की वोह आतंकवादियो को सरन दे रहा है। यह कन्डीशन तो उसके लिया ghaatak होगी। खास तौर पैर tab जबकि ये सामने आ चुका है की उसने कुछ तेररोरिस्त को नजरबन्द कर चुका है। शान्ति तो सभी caahte है फिर ऐसा क्यों।

Sunday, January 4, 2009

यूँ हुई शुरुआत


नए साल में कुछ नया करने का सोचा। कुछ ऐसा जो अपनों से नज्दिकिया बढाये। जहा विचार एक हो। सुझाओ हो। ऐसे में एक मित्र की सलाह पर ब्लॉग शुरू करने का मन बनाया। जानता तौ था ब्लॉग्गिंग पर ब्लॉग बनाना इतना आसान है य�POST http://www.blogger.com/post-edit.do HTTP/1.0� नही जनता था। अब मन करता है मैं रोज़ कुछ लिखूं। इसमे आपके सुझाओ और कमेन्ट मुझे हौंसला देंगे। विशिंग यू अ वैरी हैप्पी न्यू इयर।