पहले तो मुझ पर इतराना
प्यार नहीं था तो क्या था
फिर तेरी आंखें भर aanaa
pyaar नहीं था तो क्या था...
केवल एक वरदान मिला था
उसमें मांग लिया तुझको
हर कीमत पर उसको पाना
प्यार नहीं था, तो क्या था...
जब-जब दान किया यह मांगा
इसका पुण्य मिले तुझको
दिल का दिल को ये नजराना
प्यार नहीं था तो क्या था...
दिल बोला मैं आऊं
तन समझाये मत जाना
इस दुविधा का बोझ उठाना
प्यार नहीं था तो क्या था
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प्यार में कितनी दुविधा होती है, '
ReplyDeleteदिल कुछ कहता है,
दिमाग कुछ और ही कहता है,
ठहरो मत आगे चलो
कोई मिल जायेगा इसी प्यार के बहाने
kya khoob likhte hai aap.
ReplyDeletepyar bahut kuch hota hai jo jaise samjhe.....
ReplyDeletemera anubhava pyar na ho to jyada thik hai nahi to kavi to ban hi jayega.