Monday, May 4, 2009

ईजी और बिजी लाइफ

ईजी और बिजी लाइफ. आपको पता है इन दोनों वड्र्स के अर्थ में क्या रिलेशन और क्या डिफरेंश है? शायद कुछ इस तरह से डिफाइन करेंगे न कि रिलेशन यह कि दोनों की वर्ड किसी एक पर्सन की लाइफ का पार्ट हैं और डिफरेंस यह कि दोनों एक-दूसरे के अपोजिट हैं. एक और रिलेशन है दोनों में, बिजी रहकर भी ईजी रहा जा सकता है और यह रुटीन का पार्ट बन जाय तो लाइफ के क्रिएटिव पार्ट को और स्ट्रांग बनाया जा सकता है, आज के फास्ट लाइफ स्टाइल की रिक्वॉयरमेंट है.मैं जानता हूं संडे के दिन सीरियस बात करना किसी को पसंद नहीं होता. फिर भी मैं इसे मैने सब्जेक्ट सेलेक्ट क्यों किया, इसके पीछे इंट्रेस्टिंग स्टोरी है. एक्चुअली मुझे संडे के लिए एक आर्टिकिल लिखना था, जो लाइट मूड भी हो और पढऩे पर बोरियत भी न हो. मैं सब्जेक्ट तलाशने के लिए दिमाग दौड़ाने में बिजी था. बिजी होकर भी ईजी कैसे रहा जाता है, इस आर्ट ऑफ लिविंग से मैं वाकिफ नहीं था तो पिछले दो-तीन दिनों से टेंशन में था. इसी दौरान मिलने आए एक फ्रेंड ने सिटी में चल रहे फेयर में चलने का प्रपोजल रख दिया. मैं बोला यार मैं पहले से ही टेंशन में हूं और तूं फेयर में घूमने की बात कर रहा है. टेंशन में होने का कारण भी उसे बता दिया, फिर भी वह नहीं माना और मुझे अपने साथ ले गया.फ्रेंड के प्रेशर में मैं घूमने के लिए तो निकल गया पर दिमाग में 'सब्जेक्ट' ही घूमता रहा. फेयर में जिस किसी भी स्टाल पर पहुंचा और आर्गेनाइजर से बात की दिमाग सब्जेक्ट तलाशने में जुट रहा. करीब एक घंटा बिताने के बाद हम दोनों आफिस लौट आए लेकिन सब्जेक्ट नहीं मिला. घूमने के बाद भी मुझे ईजी फील न करते देखकर फ्रेंड बोला अब तो सब्जेक्ट मिल गया है फिर क्यों टेंशन में है? मैं चौंका और पूछ बैठा आखिर है क्या सब्जेक्ट? उसने कहा ईजी और बिजी. सब्जेक्ट तो मुझे जंच गया पर इसे एस्टेब्लिश कैसे करुंगा? इस पर फंस गया.फ्रेंड ने एक बार फिर से साथ दिया और बोला बिजी को ईजी में कन्वर्ट करो, हो जाएगी प्राब्लम साल्व. उसने कहा, तुम्हें क्या लगता है फेयर आर्गेनाइज करने वाले बिजी नहीं हैं? यहां स्टाल लगाने वाले बिजी नहीं हंै? या फिर फेयर में आने वाले लोग बिजी नहीं हैं? इसके बाद भी सब एंज्वॉय कर रहे थे क्योंकि आज छुट्टी का दिन है. बिजी इसलिए हैं क्योंकि प्रोफेशनल रिक्वॉयरमेंट है और ईजी रहकर एंज्वॉय इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे अपना दिन खराब नहीं करना चाहते. इसे थोड़ा और क्लीयर करने के लिए उसने मुझे रियलिटी शोज के बारे में बताया. पूछा इसमें जजेज का क्या रोल होता है? मैंने कहा परफार्मेंस को जज करना. उसने कहा उनका रोल परफार्मर के एक-एक स्टेप को मॉनीटर करना होता है फिर भी वे ईजी रहते हैं. फिर उसने पूछा आफिस में तुम्हारा क्या रोल है? मैने जवाब दिया कलीग्स की वर्किंग को जज करना. उसने कहा जब रियलिटी शो हो या फिर कुछ और. कुछ नहीं तो हर कोई अपने आप में तो बिजी है ही. फिर भी सब ईजी रहते हैं क्योंकि ऐसा नहीं होने पर उनकी क्रिएटिविटी खत्म हो जाएगी. फिर तुम क्यों टेंशन मोल लेते हो. इससे तो दिमाग में कोई नया आइडिया ही नहीं आएगा.फ्रेंड की इन बातों से मुझे एहसास हुआ कि मैं क्या कर रहा था. मैने आज अपनी लाइफ का एक इंपार्टेंट डे कैसे मिस कर दिया. यह आइडिया मेरे दिमाग में क्यों नहीं आया कि ईजी और बिजी भी सब्जेक्ट हो सकता है. वैसे यह सवाल हर किसी के लिए बड़ा है. बिजी तो अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा से लेकर हमारे ऑफिस में काम करने वाला रिपोर्टर तक है. हो सकता है टेंश भी हो पर इस कारण के चलते ओबामा ने न तो दुनिया से मुंह मोड़ा है और न मेरे कलीग्स ने जो रोज सुबह डिफरेंट स्टोरी आइडियाज के साथ आफिस में आता है. अब मुझे लगने लगा है सिर्फ सोच का फर्क है. सोच को बिजी करके कभी भी ईजी नहीं रहा जा सकता और ईजी रहकर भी बिजी रहा जा सकता है. सिर्फ बिजी रखने से टेंशन बढ़ेगा और ईजी रहकर बिजी रखने से काम को एंज्वॉय करने का मौका मिलेगा. ईजी रहने पर नए आइडियाज दिमाग में आएंगे या फिर पुराने आइडिया को और एक्सप्लोर करने का मौका मिलेगा तो बिजी रहकर टेंशन मोल लेने पर दिमाग ही ब्लाक हो जाएगा और पॉसिबल है सोचा हुआ भी दिमाग से मिस हो जाए. फ्रेंड के फंडे से मैं रिलैक्श फील करने लगा हूं और मेरा आर्टिकिल भी पूरा हो गया है.

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