Monday, May 4, 2009

Parenting ke bahane

आप अपने ब'चे के साथ कितना टाइम स्पेंड करते हैं? क्या आप अपने ब'चे के पॉजिटिव और निगेटिव क्वालिटीज से फेमिलियर हैं? ब'चे के निगेटिव प्वाइंट्स को जानने के बाद आपने क्या किया? ब'चे की डेली रुटीन कैसी होने चाहिए? आज का एजूकेशन सिस्टम कैसा होना चाहिए? क्या आप जानते हैं ब'चे को पाला कैसे जाता है? किस एज ग्रुप में उन्हें कैसे हैंडिल किया जाता है? अटपटे से लगते हैं न ये सवाल. अब थोड़ा फ्लैश बैक में चलते हैं. मेगा स्टार अमिताभ ब'चन, जयप्रदा और प्राण की सुपरहिट मूवी 'शराबी' याद है. इन सवालों का जवाब देती है यह मूवी जहां सही पेरेंटिंग नहीं होने से तमाम फेसिलिटी के बीच एक युवा रास्ते से भटक कर ऐसे रास्ते पर चल पड़ता है जो उसे पिता से ही अलग कर देता है. पिछले दिनो एक और मूवी आई थी 'ओम जय जगदीश' जहां पिता के न होने के बाद भी मां से मिले संस्कारों (पेरेंटिंग) ने तीन भाइयों को इस तरह से बांधा कि वे बड़े भाई को ही सब कुछ मानने लगे. निकलते हैं फ्लैश बैक से क्योंकि ये सवाल अब हर पेरेंट्स के लिए इंपार्टेंट हो गए हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्कूलों में पेरेंट्स का इंटरव्यू तो बंद कर दिया गया है लेकिन पैरेंटिंग के बहाने इन सवालों का पूछा जाना बहुत ही कामन है. इन सवालों को फेस करना किसी चैलेंज से कम नहीं है क्योंकि आम तौर पर इसे होम डिपार्टमेंट ही डील करता है. इसका सॉल्यूशन जानने के लिए मैं मिला पैरेंटिंग एक्सपर्ट से. उन्होंने भी पहले मेरे से ढेर सारे सवाल किए. मसलन, आपका ब'चा कितने टाइम तक टीवी देखता है? टीवी पर वह क्या देख रहा है, इसे भी कभी मॉनीटर किया है? उसका सोने और उठने का शिड्यूल क्या है? आप उसे दिन में कितनी बार गले से लगाते हैं? क्या उसे बैठने, उठने, बात करने को लेकर टोकते या डांटते हैं? उसके जीवन में अनुशासन कितना इंपार्टेंट है. इन सवालों का मैंने जो जवाब दिया उससे पता चला कि मैं तो खुद ही अपने ब'चे के बिगडऩे का रास्ता बना रहा हूं? याद आ गया बड़े भाई का बेटा जो उनके लिए टेंशन बन गया है. जो उनकी कोई बात नहीं मानता और किसी बात पर डांटने पर कहता है कि पिटाई करेंगे न व भी कर लीजिए और क्या कर सकते हैं. घर से तो निकालेंगे नहीं. एक्सपर्ट ने कहा बपचन ब'चे की नींव पडऩे का समय होता है, इस समय पैरेंटिंग में चूक हो गई तो फिर पछताने के सिवा कुछ नहीं रहेगा. उन्होंने बताया ब'चा तो पांच साल का होते-होते एबीसीडी, क ख ग घ के साथ ही नंबर काउंटिंग भी सीख ही लेगा. लेकिन उसके आसपास चलने वाली चीजों का सीधा रिलेशन फ्यूचर से जुड़ा है. सबसे बड़ी बात खुद अनुशासित बनें और ब'चे को भी अनुशासित बनावें. उसके सोने-जागने का टाइम फिक्स करें. पढऩे और खेलने का टाइम फिक्स करें. सिक्युरिटी रीजंस के चलते घर से निकलना बंद कराकर वीडियो गेम खेलने की आदत डालना उसकी बॉडी ग्रोथ के साथ ही पर्सनॉलिटी ग्रोथ के लिए भी हानिकारक है. इसलिए उसे ग्रुप में खेलने का इंतजाम तो हर हाल में किया ही जाना चाहिए और इन सब से ऊपर है उनके पास टाइम पास करना. उनकी बातों को सुनना और समझना और उन्हें जादू की झप्पी देना. इसका सबसे ज्यादा पॉजिटिव एफेक्ट ब'चे पर पड़ता है और इससे कम्युनिकेशन गैप भी नहीं होता. ब'चा स्कूल के एक्सपीरिएंस से लेकर फ्रेंड्स से होने वाली बातचीत तक आपसे शेयर करे, यह निहायत जरूरी है. इससे उसकी सोच का पता चलेगा. एक्सपर्ट के साल्यूशन ने मुझे चौकन्ना कर दिया. मुझे एहसास होने लगा चार सालों के दौरान मैंने क्या खो दिया है और उसे कैसे पाना है. सच बताऊं, अंदर तक डर गया था. मैंने इन सारी बातों को अपनी वाइफ से शेयर किया तो उसका भी जवाब था कि हम तो सिर्फ ब'चा हंसता-खेलता आंखों के सामने रहे, इसी पर फोकस करते हैं. साल के महीनों का नाम नहीं बताने पर डांटते हैं. माई नेम इज... बताने पर खुश तो होते हैं, कभी-कभी जादू की झप्पी भी देते हैं लेकिन यह रेग्युलर हैबिट में नहीं है. यह मत करो, वह मत करो, यहां मत जाओ, वहां मत खेलो, यह तो शायद ब'चे के लिए निकलने वाले हर लाइन के साथ जुड़ा होता है. मुझे एहसास हो गया हम कितने गलत हैं और ब'चे को पालना कितना कठिन. लेकिन, मैंने नसीहत भी ले ली है, ब'चे का कोई भी मामला इग्नोर नहीं करुंगा. मैं जानता हूं उसे न डांटने का संकल्प लेना कितना कठिन है क्योंकि अपना फ्रस्टेशन तो आम तौर मैं या तो वाइफ या फिर ब'चे पर उतारता हूं. आप क्या करते हैं? अ'छा है, यदि आप अपने को संभाल चुके हैं, नहीं तो ध्यान जरूर दें क्योंकि ब'चा तो आपका ही है और फ्यूचर भी.

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